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Showing posts from March, 2022

बलराम श्री कृष्ण के बड़े भाई व शेषनाग के अवतार

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  पांचरात्र शास्त्रों के अनुसार   बलराम   (बलभद्र) भगवान वासुदेव के ब्यूह या स्वरूप हैं। उनका   श्रीकृष्ण   के अग्रज और   शेष   का   अवतार   होना ब्राह्मण धर्म को अभिमत है।   जैनों   के मत में उनका सम्बन्ध तीर्थकर   नेमिनाथ   से है। [1] अन्य नाम संकर्षण , हलधर , हलायुध , रोहिणीनन्दन , काम , नीलाम्बर आदि। संबंध शेषनाग  का  अवतार मंत्र ॐ हलधाराय संकर्षणाय नम: अस्त्र हल ,  गदा जीवनसाथी रेवती माता-पिता वसुदेव  (father) रोहिणी  (mother) भाई-बहन कृष्ण  और  सुभद्रा संतान निषस्थ , उल्मुख और  वत्सला शास्त्र महाभारत  और अन्य पुराण त्यौहार बलराम जयन्ती बलराम ( बाएँ ) अपने भाई  श्रीकृष्ण  और बहिन  चित्रा (सुभद्रा)  के साथ  जगन्नाथ रथ यात्रा  में बलराम या संकर्षण का पूजन बहुत पहले से चला आ रहा था, पर इनकी सर्वप्राचीन मूर्तियाँ   मथुरा   और   ग्वालियर   के क्षेत्र से प्राप्त हुई हैं। ये   शुंगकालीन   हैं।   कुषाणकालीन   बलर...

विश्वामित्र वैदिक काल के एक महान ऋषि

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  विश्वामित्र   वैदिक  काल के विख्यात  ऋषि  ( योगी ) थे। ऋषि विश्वामित्र बड़े ही प्रतापी और तेजस्वी महापुरुष थे। ऋषि धर्म ग्रहण करने के पूर्व वे बड़े पराक्रमी और प्रजावत्सल नरेश थे ! रचनाएँ विश्वमित्र जी को गायत्री मन्त्र का दृष्टांत हुआ। क्षत्रिय राजा के रूप में प्रजापति के पुत्र कुश, कुश के पुत्र कुशनाभ और कुशनाभ के पुत्र राजा गाधि थे। विश्वामित्र जी उन्हीं गाधि के पुत्र थे। विश्वामित्र शब्द विश्व और मित्र से बना है जिसका अर्थ है- सबके साथ मैत्री अथवा प्रेम। एक दिन राजा विश्वामित्र अपनी सेना को लेकर  वशिष्ठ  ऋषि के आश्रम में गये। विश्वामित्र जी उन्हें प्रणाम करके वहीं बैठ गये। वशिष्ठ जी ने विश्वामित्र जी का यथोचित आदर सत्कार किया और उनसे कुछ दिन आश्रम में ही रह कर आतिथ्य ग्रहण करने का अनुरोध किया। इस पर यह विचार करके कि मेरे साथ विशाल सेना है और सेना सहित मेरा आतिथ्य करने में वशिष्ठ जी को कष्ट होगा, विश्वामित्र जी ने नम्रतापूर्वक अपने जाने की अनुमति माँगी किन्तु वशिष्ठ जी के अत्यधिक अनुरोध करने पर थोड़े दिनों के लिये उनका आतिथ्य स्वीकार कर लिया।...