अर्क कथा 🌞



दिन प्रतिदिन अर्क दिखे, 

कंचन की भांति होत। 

पूर्व से पश्चिम हुए, 

हुआ चारों ओर सोन। 


अंबर में हुआ विडंबन, 

शीत ऋतु की ओन। 

दिखे दिवाकर शाम को, 

फिर अंधेरा होत।




                        अभिषेक त्रिपाठी

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