भाद्रमास गीत
चारु, चंद, चमकत है बदरा,
बीच प्रकट हुयी दामिनी।
बरसे बादल भादों में,
खर्चा बढ़े न बढ़े आमदनी।।
नीर, नयन, नजदीक बहे,
बहे बर्षा के संग।
घोर बदरिया चमकत हैं,
चारों ओर उमंग।।
हरियाली हुयी सवेरा,
गान, गीत, गोविंद।
बरसे बादर छम- छम,
दादुर की यह प्रीत।।
बोल रहा है जोर- जोर से,
टर- टर की शोर।
यहर अनहरिया झाकत है,
अमेरिका मे अजोर ।।
अभिषेक त्रिपाठी
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