चलेंगे हम साथ साथ

 चलेंगे हम साथ साथ

जीवन में विजय अनुशासन का

अनुभव प्रीत पुरानी ।

 रस छिपा है आदर का, 

 बड़पन की निशानी ॥


दुवपूर्ण हैं रास्ते सभी, 

परिश्रम तथ्य निराला |

 ऐसे हैं वीर यहाँ भी

 जिन्होंने देश संभाला ॥


सुन सको या ना सुनो,

यह कथन यह है पूर्ण। 

जीवन से आर्शीवाद बिना,

नही कोई है पूर्ण।। 


ज्ञान हैं  तो ज्ञानी, 

उसके बिना अभिमानी। 

कर्म विशाल बहुतेरे, 

धीर गंभीर अकेले।। 


धन नही था उनके पास, 

मन मे बसा है निश्चय साथ। 

छोड़ मोटापा मन का, 

चलेंगे हम साथ- साथ।। 



                           अभिषेक त्रिपाठी



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