नर नारायण

 नर-नारायण हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु के चौबीस अवतारों में से चौथे अवतार थे । इस अवतार में विष्णु जी ने नर और नारायण रूप में जुड़वाँ संतों के रूप में अवतार लिया था । इस रूप में बद्रीनाथ तीर्थ में तपस्या की थी। धर्मशास्त्रों के अनुसार, भगवान नर और नारायण ब्रह्मदेव के प्रपौत्र थे। ये ब्रह्माजी के बेटे धर्म और पुत्रबधु रुचि की संतान थे। ये भगवान विष्णु के अवतार हैं। पृथ्वी पर धर्म के प्रसार का श्रेय इन्हीं को जाता है। कहते हैं कि द्वापर युग में नर-नारायण की श्रीकृष्ण और अर्जुन के रूप में जन्मे। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान नर-नारायण ने ही अपनी जांघ से स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी को जन्म दिया था। 



इन्होंने ही द्वापर में श्रीकृष्ण और अजुन के रूप में अवतार लेकर पृथ्वी का भार हरण किया।

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