अनुसन्धान के प्रकार

शोध के प्रकारों का निर्धारण उनके कार्यों के आधार पर किया गया है। जैसे-


मात्रात्मक अनुसंधान- मात्रात्मक अनुसंधान शोध का एक प्रकार है। यह एक रेखीय होता है। इसके अंतर्गत संख्यात्मक तथ्यों की संकल्पना की जाती है। इसमें निगमनात्मक तर्क पद्धति का प्रयोग किया जाता है।[२]

गुणात्मक अनुसंधान- शोध के इस प्रकार में निर्णय के न केवल क्या, कहां, कब की छानबीन की जाती है, बल्कि क्यों और कैसे जैसे प्रश्नों की भी खोज की जाती है।

विवरणात्मक अनुसंधान- इस प्रकार के शोध के अंतर्गत अध्ययन के समय जो परिस्थितियाँ हैं उनका उसी रूप में शोधार्थी द्वारा प्रस्तुतीकरण किया जाता है। इसमें तथ्यों का संकलन महत्वपूर्ण होता है।

विश्लेषणात्मक अनुसंधान- विश्लेषणात्मक शोध (Analytical Research) – शोधकर्ता का चरों (variables) पर नियंत्रण होता है। शोधकर्ता पहले से उपलब्ध सूचनाओं व तथ्यों का अध्ययन करता है। इस प्रकार के अनुसंधान का परिचय देते हुए 'शोध प्रविधि' नामक पुस्तक में डॉ. विनयमोहन शर्मा लिखते हैं कि- "व्याख्यात्मक या वर्णनात्मक शोध में मानव-जीवन की सभी वर्तमान समस्याओं पर, चाहे वे साहित्य, समाज-विज्ञान या शुद्ध विज्ञान से सम्बन्ध रखती हों, अनुसन्धान किया जाता है।"


ऐतिहासिक अनुसंधान (Historical Research) उन तकनीकों और दिशानिर्देशों का समुच्चय है जिनका उपयोग इतिहासकार अतीत के इतिहास के अनुसन्धान तथा लेखन के लिए करते हैं। इसके लिए प्राथमिक स्रोतों और पुरातत्व सहित अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जाता है। इतिहास के दर्शन में, ज्ञानमीमांसा नामक उपक्षेत्र में एक उचित ऐतिहासिक विधि की सम्भावना एवं प्रकृति का प्रश्न उठाया जाता है। ऐतिहासिक पद्धति तथा इतिहास लेखन की विभिन्न विधियों के अध्ययन को इतिहासलेखन (historiography) कहते हैं।



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