बिल्ला सेठ बिल्लू
बिल्ला सेठ बिल्लू,
कहावत सुनो मेरे उल्लू।
पहाड़ा है पहाड़,
तुम भी मिलकर, चूहा बनो आठ।
धीरे धीरे तुम शुरू करो पाठ।
जिससे अज्ञानता की गर्मी,
हो जाए शांत।।
जन्मजात न होई विद्वाना,
संघर्ष से बनत महाना।
जलकुंभी जैसी जल में आयी,
बीतत समइया सरोवर छायी।
विद्या रूप कार्य बहु तेरे,
पढ़त उमरिया ज्ञान मेरे।।
जन जीवन की यही कहानी,
जितना पढ़बा उतना बड़ ज्ञानी।।
जाति पाती का एके साजा,
अनपढ़ बीच पढ़ाकू राजा।
मानव प्रतिदिन सोच विचारी,
कार्य करे कुछ नाही।
सुंदर नारी भी श्रृंगारी,
कार्य करे कुछ नाही।।
व्यर्थ धरा पर आए हो,
मिला नही जब तक उद्देश्य।
कर्मो का यह फल है,
जिसमे करते है प्रवेश।।
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Pen Star Dev Babu 👑 ❣️
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