Posts

Showing posts from January, 2022

तितली है महारानी

Image
नव कोमल लावा जैसा,  पैदा हुआ संसार में।  दिखा पुष्प पत्तो पर हमको,  अंड्डे समूह का थान हैं।  सुंदर सुदूर जाने वाली ,  सबके मन को हर्षाने वाली,  ये तितलिया।।  जीवन मे चार जनम जीली,  अंड्डज, लार्वा, प्यूपा, तितली।  पंच दिनों बाद देखा, हरे कीड़े के समान पड़े।  कितनो को अन्य चिड़िया, बिलनी लेकर उड़े।।  यह छोटा लार्वा बढ़ता जा रहा,  अपनी त्वचा छोड़ता जा रहा।  अब तो नये रूप मे आ गया,  भूरा और छोटी पत्तों जैसा दिखने लगा ।  ये छोटे पत्ते ही बने है पंख,  कुछ समय के बाद आये इसमे रंग।  सुंदरता की लम्बी कहानी इसीलिए तितली है महारानी।                                       अभिषेक त्रिपाठी

भैया अध्ययन हुआ जरूरी

Image
  क्लास चल रहा है भर-भर कर,  जले ना ज्ञान की बाती।  विद्यालय व्यवसाय का अड्डा, छात्र भये व्यस्त वासी।।  विद्यालय में जा रहे हैं,  ज्ञान का अर्जन हुआ बहाना।  विद्यालयों में जाने से,  मिले साधन जिससे पहचाने जमाना।। मेल मिलाप बढ़ता,  व्यवहारिक ज्ञान घटता। सुंदरता, ब्राह्य आवरण का,  मन में ना जाके कोई।  जीवित है जैसे नारी के गर्भ में जीव ।  जैसे उगता सूरज महान,  नहीं है शब्दों का विशेष ज्ञान।  अध्ययन हुआ जरूरी,  भैया अध्ययन हुआ जरूरी।।                                            अभिषेक त्रिपाठी                                     

ईश्वर है महान

Image
  कोई नही महान,  जग शून्य सूना है इंसान,  कोई नहीं महान।।  ईश्वरी शक्ति का अंश,  बाकी सभी है भस्म। जहां से आए वहां जाना पड़ेगा।  इस पंक्ति को गुनगुनाना पड़ेगा।  कोई नहीं महान,  जग शून्य और सूना इंसान ।  कोई नहीं महान।।  कवि ,कबीर ,रहीम, रैदास सहित,  केवल दिहिं चोट।  बड़े सामुदायिक श्रृंखला पर किया प्रतिकार , इसीलिए क्या वे हुए महान? आ प्रकटा नया है खोजी,  करता है प्रहार । ,  उसके समय जो महान,  क्या यही है समाज । कोई नहीं महान, जग शून्य और सूना इंसान,  कोई नहीं महान।। देश विदेश में व्यापक भरे पड़े औजार,  शक्तिशाली देश करता है बखान।  हम ही हैं महान,  भ्रम में जी रहे प्राणी, अंत समय कोई नहीं पहचान। वैदिक काल का एक ही मंत्र , वसुदेव कुटुंबकम, मिल कर रहे हम सब। जो करे प्राणी-प्राणी में नाही भेद,  वही महान वही हैं श्रेष्ठ। वह ईश्वर हैं जो बसा है सबके भीतर।  और कोई नही महान जग शून्य और सूना इंसान।  कोई नहीं महान।।  सर्वश्रेष्ठ का यही कथन, अपने अग्रजो का किया पतन।  श्रेष्ठ नाम...

भाद्रमास गीत

Image
चारु, चंद, चमकत है बदरा,  बीच प्रकट हुयी दामिनी।  बरसे बादल भादों में,  खर्चा बढ़े न बढ़े आमदनी।।  नीर, नयन, नजदीक बहे,  बहे बर्षा के संग।  घोर बदरिया चमकत हैं,  चारों ओर उमंग।।  हरियाली हुयी सवेरा,  गान, गीत, गोविंद।  बरसे बादर छम- छम,  दादुर की यह प्रीत।।  बोल रहा है जोर- जोर से,  टर- टर की शोर। यहर अनहरिया झाकत है,  अमेरिका मे अजोर ।।                                अभिषेक त्रिपाठी

चलेंगे हम साथ साथ

  चलेंगे हम साथ साथ जीवन में विजय अनुशासन का अनुभव प्रीत पुरानी ।  रस छिपा है आदर का,   बड़पन की निशानी ॥ दुवपूर्ण हैं रास्ते सभी,  परिश्रम तथ्य निराला |  ऐसे हैं वीर यहाँ भी  जिन्होंने देश संभाला ॥ सुन सको या ना सुनो, यह कथन यह है पूर्ण।  जीवन से आर्शीवाद बिना, नही कोई है पूर्ण।।  ज्ञान हैं  तो ज्ञानी,  उसके बिना अभिमानी।  कर्म विशाल बहुतेरे,  धीर गंभीर अकेले।।  धन नही था उनके पास,  मन मे बसा है निश्चय साथ।  छोड़ मोटापा मन का,  चलेंगे हम साथ- साथ।।                              अभिषेक त्रिपाठी

दिया चिड़िया ने यह संदेश

Image
  दिया चिड़िया ने यह संदेश  प्रातः काल की बेला,   उर आनंद की रेखा,   हमने एक चिड़िया देखा।  चहक-चहक की मधुर ध्वनि,  महक रहा फूलों से वन,   इस डाल से उस डाल,  भटक रही भोजन की तलाश।  दिया। चिड़िया ने यह संदेश,  परिश्रम करना है उद्देश्य।। चिड़ियों की रानी है कोयल,  मधुर गीत सुनाती है,  सबके मन के अंतर्गत,  अपने रंग बसंती दिया।  दिया चिड़िया ने यह संदेश,  मीठी बोली बोलना है उद्देश्य ।। धरा से उठकर,  नभ को छूती,  नही हुआ उसको अभिमान,  पक्षी तो बेजुबान, इनको सबकी पहचान।  दिया चिड़िया ने यह संदेश,  परिश्रम करना है उद्देश्य।।                                      अभिषेक त्रिपाठी

अभिषेक त्रिपाठी की पंक्तिया

Image
कनक-कनक सब कहत, कंचन कहे ना कोई ।  सब कोई बुझत नाहीं,  कंचन कनक एक होत।  जीवन एक जल का बुला, हवा रूपी काल।  मारे एक झोंका मिल जाए, यही पर जीवन-लीला समाप्त।  चरित्र नाम की झांकी, देखने में समान।  ईर्ष्या से बैरी बने, दया से दयावान।  गुण सब खोवत है, मानव  एक मीन।  मिट्टी में मिल जात, कनक होत हीन।  क्षमा बड़न को, छोटों को उत्पात।  क्षमा करत प्रेम बढ़त, बड़ेन के यह काम।  गजब नगरिया नाटक का, एक एक बंदर आए। देख तमाशा दुनिया का, बड़े बड़ाई गाए।  सत्य वचन सत्य नाव है, मूर्ख बसे चार और ।  मूर्खों से ना उलझहिये, उन्हें प्रमुखता दो।  ज्ञान खड़ा है मिट्टी का, सुंदर जीवन काल।  दुख-सुख में अंतर यही, विष-सुधा का साथ।  बड़े बड़ाई ना करे, चाहे कितनो तकलीफ।  छोड़ अटरिया भाग चले, हिमालय में लीन। जनहु जान मनु देर लगाई,  पश्चात बन तमाशा, भीतरिया आग लगाई।  प्रातः उदय न होत सवेरा, बीतत दिन एकदम अंधेरा।।                              ...

बसंत गीत

Image
देखो प्यारे आया वसंत,   कितना प्यारा कितना सुंदर।  खेतों में हरियाली आयी,   मानव मन को भायी।  बसंत पंचमी आयी,  विद्यार्थी मन के अंदर उत्साह जगाई।  भोर में आम्र के डाल पर,  मधुर संगीत का आगमन, कू कू कोयल बोल रही हरदम।                             अभिषेक त्रिपाठी

अर्क कथा 🌞

Image
दिन प्रतिदिन अर्क दिखे,  कंचन की भांति होत।  पूर्व से पश्चिम हुए,  हुआ चारों ओर सोन।  अंबर में हुआ विडंबन,  शीत ऋतु की ओन।  दिखे दिवाकर शाम को,  फिर अंधेरा होत।                         अभिषेक त्रिपाठी