तितली है महारानी
नव कोमल लावा जैसा, पैदा हुआ संसार में। दिखा पुष्प पत्तो पर हमको, अंड्डे समूह का थान हैं। सुंदर सुदूर जाने वाली , सबके मन को हर्षाने वाली, ये तितलिया।। जीवन मे चार जनम जीली, अंड्डज, लार्वा, प्यूपा, तितली। पंच दिनों बाद देखा, हरे कीड़े के समान पड़े। कितनो को अन्य चिड़िया, बिलनी लेकर उड़े।। यह छोटा लार्वा बढ़ता जा रहा, अपनी त्वचा छोड़ता जा रहा। अब तो नये रूप मे आ गया, भूरा और छोटी पत्तों जैसा दिखने लगा । ये छोटे पत्ते ही बने है पंख, कुछ समय के बाद आये इसमे रंग। सुंदरता की लम्बी कहानी इसीलिए तितली है महारानी। अभिषेक त्रिपाठी